आज का धृतराष्ट्र, जो खुद ही बैल को उकसा रहा है।
एक आदमी नदी के किनारे बहुत उदास सा बैठा था। उससे कुछ दूरी पर एक संत भी बैठे थे, अपने प्रभू के ध्यान में। अचानक उनका ध्यान इस दुखी आदमी की ओर गया। संत उठ कर इसके पास आए और पूछा कि तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं लग रही उदास भी बहुत हो क्या बात है? संत के प्रेम...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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[28 Apr 2010 10:21 AM]



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