At the Library
कभी कभी किसी दूसरे (के) नज़रिए से देखने की आदत है चीज़ों को ..... और कभी कभी कुछ बातें जो सहज भाव से आती हैं .... वो बिलकुल ही खिचडी भाषा में होती हैं. ऐसा ही एक ख़याल ..... जैसे आया वैसे ही पेश है ..... और फिर उस ख़याल को हिंदी में लिखने की कोशिश .... साथी...
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अमिताभ मीत
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[28 Apr 2010 10:23 AM]



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