फिर भी ड़र तो लगता ही है न ?
मैंने,सीखा वक्त के साथ दीवार के पार देखना/देख लेना चेहरे के पीछे चेहरा सूरज, जहाँ डूबता प्रतीत होता है वहाँ की गहराई नाप लेना मैंने, यह भी सीखा कि जिंदा रहने के लिये जो जरूरी है कैसे किया जाये? जिन्दा बने रहने के लिये जो भी जरूरी हो सीखा,तो यह भी था कि...
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मुकेश कुमार तिवारी
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[28 Apr 2010 09:55 AM]



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