फिर भी ड़र तो लगता ही है न ?

कवितायन मैंने,सीखा वक्त के साथ दीवार के पार देखना/देख लेना चेहरे के पीछे चेहरा सूरज, जहाँ डूबता प्रतीत होता है वहाँ की गहराई नाप लेना मैंने, यह भी सीखा कि जिंदा रहने के लिये जो जरूरी है कैसे किया जाये? जिन्दा बने रहने के लिये जो भी जरूरी हो सीखा,तो यह भी था कि... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
views
14
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
10
[28 Apr 2010 09:55 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix