बन्धनों में रहूँ मैं ये संभव नहीं
बन्धनों में रहूँ मैं ये संभव नहीं॥अनवरत साथ दूँ मैं ये संभव नहीं॥मेरी प्रतिबद्धता का ये आशय कहाँ, झूट को सच कहूँ मैं ये संभव नहीं॥मैं हूँ मानव,मैँ तोता या मैना नहीं,जो पढाओ पढूँ मैं ये संभव नहीं॥पत्थरों में प्रतिष्ठित करूँ प्राण मैं,सब के आगे झुकूँ मैं...
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युग-विमर्श
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[28 Apr 2010 06:45 AM]



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