अस्पताल
परियों की तरहहवा में उड़ रही हैंपरिचारिकाएँदेवताओं की तरहलग रहे हैं चिकित्सकविज्ञान और प्रार्थनास्वर्ग और नर्कनिश्चय और अनिश्चय के बीचझूल रहा हैधरती का यह छोटा-सा टुकड़ा....
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मणिमोहन
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[28 Apr 2010 06:52 AM]



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