इससे बड़ी दुर्घटना क्या होगी?
लेखक कुलवंत हैप्पीजिन्दगी सफर थी, लेकिन लालसाओं ने इसको रेस बनाकर रख दिया। जब सफर रेस बनता है तो रास्ते में आने वाली सुंदर वस्तुओं का हम कभी लुत्फ नहीं उठा पाते, और जब हम दौड़ते दौड़ते थक जाते हैं अथवा एक मुकाम पर पहुंचकर पीछे मुड़कर देखते हैं तो बहुत कुछ...
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Kulwant Happy
कुलवंत हैप्पी
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[28 Apr 2010 04:59 AM]



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