आम आदमी !

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति आम आदमी हुक्का गुड़गुड़ाता है, चिलम पीता है और वो ना मिले तो बीड़ी सुलगाता है । हुक्का बचे ही कितने हैं और ना अब वो शौक रहा हुक्का-पानी बंद करने वाला । इसी लिये हुक्के का क्रेज़ ख़त्म हो गया । वैसे अच्छी चीज़ थी हुक्का, बस गुड़गुड़ाते रहो और खाँसते रहो । जब... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :

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[28 Apr 2010 04:47 AM]

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