॥ सजाया है खोंपा॥

जनपद (मुंडारी लोकगीत का काव्यांतर : बारह)हे मां, यह किस चीज सेसजाया है खोंपा,चकचक कर रहा है!हे मां, यह किस सूत सेबनी है साड़ी,धारीदार दिख रही है!हे बिटिया, यह सरसों तेल मेंचुपड़ा खोंपा है,चकचक कर रहा हैबिटिया, बड़ी जात वाली कपास कासूत है यहजो धारीदार दिख रहा है।... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[28 Apr 2010 03:35 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix