॥ सजाया है खोंपा॥
(मुंडारी लोकगीत का काव्यांतर : बारह)हे मां, यह किस चीज सेसजाया है खोंपा,चकचक कर रहा है!हे मां, यह किस सूत सेबनी है साड़ी,धारीदार दिख रही है!हे बिटिया, यह सरसों तेल मेंचुपड़ा खोंपा है,चकचक कर रहा हैबिटिया, बड़ी जात वाली कपास कासूत है यहजो धारीदार दिख रहा है।...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[28 Apr 2010 03:35 AM]



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