पारदर्शिता

Ajnabi हर आयी हुई सांसबस पल भर ठहर कर सीने मेंफिर कुछ नया लेनेआकाश में जाती है!हमारे मशीनी जिस्म काहमेशा ताजा जिन्दा रहने का यह अनूठा कुदरती तरीका हैफिर पता नहीं क्योंमैंहर शामधुंधली रोशनी मेंगुजश्ता अहसासों के जहरीले जंगलों में क्या ढूंढता हूंमैंने सांसों को... [पूरी पोस्ट]
writer Rajey Sha

कवि‍ता Kavita

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[28 Apr 2010 02:59 AM]

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