जब हवाएं शिथिल पड़ गयीं

युग-विमर्श  (YUG -VIMARSH)   یگ ومرش जब हवाएं शिथिल पड़ गयीं। मान्यताएं शिथिल पड़ गयीं॥ऐसे साहित्य कर्मी जुड़े,संस्थाएं शिथिल पड़ गयीं॥शून्य उत्साह जब हो गया, भावनाएं शिथिल पड़ गयीं॥गीत संघर्ष के सो गये,वेदनाएं शिथिल पड़ गयीं।शोर संसद भवन में हुआ, शारदाएं शिथिल पड़ गयीं॥हम दलित भी न कहला... [पूरी पोस्ट]
writer युग-विमर्श
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[28 Apr 2010 01:58 AM]

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