तो फिर बस

आपका पन्‍ना दूर हो जाएं आपसे कोई गम न हो बस चाहें इतनाकुछ कमी लगे जब हम न होंहर एक खुशी में आपकी शामिल होंना हो सामने तो हमारी यादें होंहमारे आपके रिश्ते की डोर इतनी पावन होजिसका गवाह प्रकृति और कण-कण होइस दोस्ती के अनमोल रिश्ते में न कोई विघ्न होन विषाद की रेखा न... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल पाण्डेय

सपना गुरु

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[28 Apr 2010 01:00 AM]

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