रहीम के दोहे-कमाने के लिये दूसरे के घर में सिर झुकाना बुरा लगता है (kamane ke vaste desh se bahar jana-rahim ke dohe)

शब्दलेख सारथी भला भयो घर से छुट्यो, हंस्यो सीस परिखेतकाके काके नवत हम, अपन पेट के हेत कविवर रहीम कहते हैं कि घर से छूटकर दूसरी जगह पर कमाना बहुत अच्छा लगता है पर इसके लिये वहां पर दूसरों के आगे सिर नवाना पड़ता है और हमारे ऊपर बैठा सबका रक्षक परमात्मा हंसता है।वर्तमान... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिन्दू-धर्म

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[27 Apr 2010 23:06 PM]

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