प्रणय के क्षण
दिये प्रणय के जो क्षण तुमने,जीवन के आधार बन गए ,घृणा, उपेक्षा, पीड़ा, दंशनपरित्यक्ता को प्यार बन गये ! सुख सज्जा के स्वप्न ह्रदय नेमिलन रात्रि में खूब सँवारे ,हुई विरह की भोर, नयन के मोती ही गलहार बन गये ! कभी निशा की शीतलता का मोल न कर पाया था जो मन...
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Sadhana Vaid
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[27 Apr 2010 21:56 PM]



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