मोक्ष: रश्मि प्रभा
वो तुम्हारे अपने नहीं थे जिन्हें साथ लेकर तुमने सपने सजाये सूरज मिलते सब अपनी रौशनी के आगे एक रेखा खींच ही देते हैं ! शिकायत का क्या मूल्य...
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kanishka kashyap
कविताkavitaसाहित्यFeatured
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[27 Apr 2010 21:34 PM]



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