वृद्धाश्रम: मकान या मानसिकता

एकोऽहम् ‘काल बेल’ की आवाज से ही नींद खुली। घड़ी देखी, अभी साढ़े छः ही बजे थे। दरवाजा खोला तो विश्वास नहीं हुआ। काका साहब सामने खड़े थे! उन्हें कोई वाहन चलाना नहीं आता। सायकिल भी नहीं। याने, लगभग सत्तर वर्षीय काका साहब, त्रिपोलिया गेट से कोई तीन किलोमीटर पैदल चलकर,... [पूरी पोस्ट]
writer विष्णु बैरागी

जीवन का इन्‍द्रधनुष

views
33
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
6
[27 Apr 2010 20:30 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix