[नाम पुराण-8] यजमान का जश्न और याज्ञिक

शब्‍दों का सफ़र प्रा चीनकाल में ज्ञान परम्परा से जुड़ी बातें धर्म के दायरे में आ जाती थीं। अधिकांशतः यह होता रहा कि धर्म-कर्म की जानकारियां ही किसी व्यक्ति के ज्ञान का पैमाना होती थीं। प्राकृतिक शक्तियों को ही मनुष्य ने विकास के प्रारम्भिक चरण से आजतक सर्वोपरि माना।... [पूरी पोस्ट]
writer अजित वडनेरकर

उत्सव

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[27 Apr 2010 17:08 PM]

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