इतना लम्बा सफ़र तय कर लिया और पता भी नही चला!
बात होती है प्रवृति की और ये मेरी प्रवृत्ति भी दोस्तों से लेकर मामूली जान-पहचान वाले को पता है कि मैंने अपने नाम को हमेशा सार्थक किया।अभी यंहा तो अभी वंहा अपना फ़ेवरेट स्टाईल रहा है और शायद इसिलिये लोग मेरे टिकाऊ होने पर शर्त भी लगा लेते थे।ज्यादा से...
[पूरी पोस्ट]
Anil Pusadkar
62
6
0
6
25
[27 Apr 2010 15:21 PM]



Shuffle








