बहस कोई भी हो किन्तु तथ्यपरक और पूर्वाग्रह रहित होनी चाहिए...
सवाल मन में न उठे तो मन का भावशून्य और विचारशून्य होना समझ में आता है और विचार आने के बाद उसको सकारात्मक दिशा न मिले तो विचारों का उठना निरर्थक जाता है। अकसर देखा गया है कि हम आपस में अथवा किसी चर्चा के दौरान किसी भी ऐसे विषय पर बहस करना शुरू कर देते हैं...
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डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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[27 Apr 2010 14:41 PM]



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