प्रेम की पाठ्यपुस्तकें नहीं होतीं

कर्मनाशा सीरिया के सर्वाधिक प्रसिद्ध कवियों में गिने जाने वाले महान अरबी कवि निज़ार कब्बानी (1923-1998) की कुछ कविताओं के अनुवाद आप पहले भी पढ़ चुके हैं । आज प्रस्तुत है उनकी दो छोटी कवितायें : (अनुवाद : सिद्धेश्वर सिंह)०१- विलग करो वसन विलग करो वसन निज देह... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer

विश्व कविता

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[27 Apr 2010 14:55 PM]

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