डर लगता है

कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में मुझे खुश होने से डर लगता है,जो न पाया उसे खोने से डर लगता है मेरे अश्क बनके तेज़ाब न जला दे मुझको इसलिए रोने से डर लगता है महफ़िल में भी सन्नाटा सुनती हूँमुझे तनहा होने से डर लगता है ख्वाब टूटकर चुभेंगे ज़िन्दगी भर मुझको सोने से डर लगता है तुम्हारी याद... [पूरी पोस्ट]
writer Sonal Rastogi
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[27 Apr 2010 14:19 PM]

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