अमेज़िंग ग्रेस

प्रत्यक्षा आज उदास होने का दिन नहीं जबकि आँख की नमी कुछ और कहती है । छाती पर जमी कोई टीस है , कई स्मृतियाँ हैं । जो सबसे नज़दीक की हैं , उन्हें भूल जाना चाहती हूँ , जो पुरानी हैं आज सिर्फ उन्हें याद करना चाहती हूँ , आज खुश रहना चाहती हूँ , आपके लिये आपकी सब तकलीफें... [पूरी पोस्ट]
writer Pratyaksha
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[27 Apr 2010 14:11 PM]

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