फहरा दो पताका............
जिंदगी के सवालों से परेशान बहुत हो गाया, अब और नहीं इस बार बदल कर रहूँगा अपनी किस्मत.......लडूंगा हर कठिनाईयों सेहिमालय के शिखर तक पहुचूँगा सारे बंधन तोड़ दूंगा....चाहे कुछ भी हो जाये इस बार बदल कर रहूँगा फिर धीरे से समझाता...
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Tej Pratap Singh
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[27 Apr 2010 13:30 PM]



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