बिना शीर्षक..
‘कुछ तो होता होगा जो दिखता नहीं, मगर लौकी के बतिया को रोज़ कुछ बड़ा करता चलता है, नहीं?’ मौसा दन्न देना बोलते, बबुनी के बालों में हल्के हाथ फिराते हुए, फिर एकदम हंसने लगते. बबुनी चौंककर उनका चेहरा देखती, फिर खपड़े की लौकी पर, और आसपास, कि कहां जादू हुआ...
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Pramod Singh
ब्लॉगिंग
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[27 Apr 2010 11:28 AM]



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