जनाब सरवर की दो मज़ीद ग़ज़लें........
ग़ज़ल : बेखु़दी आ गई लेकर कहाँ....... बेखु़दी आ गई लेकर कहाँ ऐ यार मुझे ? कर गई अपनी हक़ीक़त से ख़बरदार मुझे ख़ूब कटती है जो मिल बैठे हैं दीवाने दो उसको शमशीर मिली ,जुर्रत-ए-इज़हार मुझे तेरी महफ़िल की फ़ुसूँ-साज़ियाँ अल्लाह!अल्लाह ! खेंच कर ले गई फिर लज़्ज़त-ए-आज़ार...
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आनन्द पाठक
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[27 Apr 2010 10:33 AM]



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