तेरी संसद में अबकी आग लगाऊंगा…
तुम्हारे उधार मैं सूद समेत चुकाऊंगा,सूंघा सरकारी कुछ भी तो खून बहाऊंगा…लूट-खसोट किया बहुत अब बारी मेरी,तेरी गोली से तेरा ही भेजा उड़ाऊंगा…तु दिखा मुझे इक जंगल और जला के अब,तेरी संसद में अबकी आग लगाऊंगा…रख बिजली अपनी और ये सड़कें अपने पास,दौड़ा-दौड़ा कर वरना...
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AnbhigyA
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[27 Apr 2010 08:55 AM]



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