एक्सक्यूज़ मी...
बोलने की इच्छा तो ये हुई – “साला सांड, बीचों बीच रस्ते में खड़ा है, आने जाने के लिए जगह पर टाँग फैलाकर खड़ा है, परे हट!” मगर प्रकटत: बहुत ही नम्र स्वर में बोला – एक्सक्यूज़ मी, थोड़ा सा जाने देंगे... जाहिर है, सामने वाले को मेरे मन में उसके प्रति उठे...
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Raviratlami
व्यंग्य
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[27 Apr 2010 08:52 AM]



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