तुम नयन गगन से उतर रहे हो....

अभिव्यक्ति तुम नयन गगन से उतर रहे हो....इस मन के समतल पर....!! मैं धारा सी मचल रही हूँ .... सागर के हिर्दय पर ....!! मैं मयूर-सी नाच रही हूँ ....तेरी ही सरगम पर ....!! चंचल नयन पखुरु हो गये ....उठते है ,संग तुम को लिये गगन पर....!! तुम नयन गगन से उतर रहे हो....रचना... [पूरी पोस्ट]
writer gargi gupta

कविता

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[27 Apr 2010 07:58 AM]

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