जब सवाल करने का हक हो ?

zindagi कोई चीत्कार सुनी नहीं मगर फिर भीचीत्कार होती है जो बिना सुने भी सुनाई देती हैअंतर्मन को झकझोरती हैसागर के फेन सा जीवन उसमें भीवक़्त के तरकश में दबी , ढकी , अंधकार में डूबी कुछ वीभत्स करतीआत्मा... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[27 Apr 2010 07:38 AM]

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