टिमटिम तारा का जाना, अवकाश, शोक और बच्चों को लगा शौक

घुघूती बासूती अभी अभी 'अनवरत' पर दिनेशराय द्विवेदी जी का राजकीय शोक पर लिखा लेख पढ़कर आ रही हूँ। इससे पहले 'मुसाफिर हूँ यारों' में नीरज जाट के चन्डीगढ़ पर तीन लेख पढ़े थे। मन यूँ ही चन्डीगढ़मय हो रहा था। सो मुझे अपने स्कूली दिनों के एक उस दिन की याद आ गई जब शोक मनाने के... [पूरी पोस्ट]
writer Mired Mirage
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[27 Apr 2010 05:11 AM]

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