" हवा उद्दंड है........"
( अपने वरिष्ठ जनों के आदेश और इच्छा का सम्मान करते हुए, इस कहानी का पुनर्प्रकाशन कर रही हूं. मेरे जिन साथियों ने इसे पूर्व में पढा है, उनसे क्षमा-याचना सहित-_"अन्नू..... उठ जाओ, छह बज गए हैं।"मम्मी की आवाज़ के साथ ही मेरी आँखें खुल गई थीं। क्या मुसीबत...
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वन्दना अवस्थी दुबे
कहानी
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[27 Apr 2010 04:59 AM]



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