आज आदमी की सोच इतनी बीमार क्यों है?(कविता), (वयंग्य)
कल जब आदरणीय गोदियाल जी की ये कविता वयंग्य पढ़ी!तो शब्दों को तो जैसे कोई पगडण्डी मिल गयी हो!बढ़ चले उस ओर ही!राह में जितने भी "क्यों" मिले सब को एकत्रित कर ले आये मेरे पास!अब मुझ अज्ञानी के पास इनके उत्तर है नहीं!शायद आप के पास हो,यही सोच कर इन्हें...
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kunwarji's
(वयंग्य)
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[27 Apr 2010 04:57 AM]



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