खामोशियां हैं आसपास और कुछ सवाल भी
खामोशियां हैं आसपास और कुछ सवाल भीकुछ रास्ता है सीधा सा और कुछ है आसपास जाल भीमुकद्दर ले जा रहा है जाने कहा और किस ओर है मंजिलधुधली हैं राहें….दूर होता है साहिल…..काश कोई संभाले कुछ देर को ही सहीइस वक्त और दूर जाते लम्हों की कहानी..... दूरियां हैं...
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अनिल पाण्डेय
सपना गुरु
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[27 Apr 2010 03:03 AM]



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