पृ्थ्वी लोक पर साठ हजार वर्ष का जीवन ?

ज्योतिष की सार्थकता केवल पदार्थ ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण संसार के प्रति हमारी मान्यताएं सापेक्षता के सिद्धान्त पर अवलम्बित हैं। दिशा का नाम लेते ही झट से पूर्व,पश्चिम,उतर,दक्षिण दिशाओं का बोध होने लगता है। धरातल को आधार मानकर ही दिशा की कल्पना की जाती है और धरातल की कल्पना भी... [पूरी पोस्ट]
writer पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

ग्रह

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[27 Apr 2010 02:27 AM]

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