नवगीत: मत हो राम अधीर...... --संजीव 'सलिल'
*जीवन के सुख-दुःख हँस झेलो ,मत हो राम अधीर.....*भाव, आभाव, प्रभाव ज़िन्दगी.मिल्न, विरह, अलगाव जिंदगी.अनिल अनल परस नभ पानी-पा, खो, बिसर स्वभाव ज़िन्दगी.अवध रहोया तजो, तुम्हें तो सहनी होगी पीर.....*मत वामन हो, तुम विराट हो.ढाबे सम्मुख बिछी खाट हो.संग कबीरा...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[27 Apr 2010 01:51 AM]



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