हमरा त फ़ोन भी टैप नहीं होता....

शिवकुमार मिश्र  और ज्ञानदत्त पाण्डेय  का ब्लॉग बहुत दिन बाद कल रतिराम जी की दूकान पर जाना हुआ. करीब डेढ़ महीने के बाद. पिछले महीने आफिस से किसी को भेजकर पान मंगवा लेते थे. मैंने सोचा मार्च महीने में जाऊँगा तो रतिराम जी मन ही मन बहुत कुछ सोच लेंगे. मन में खुद से बात भी कर सकते हैं कि; "कैसा बैठा-ठाला... [पूरी पोस्ट]
writer Shiv
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[27 Apr 2010 01:41 AM]

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