उस अनाम रेलवई वाले को धन्यवाद !

कुछ तो है... जो कि, आखिर यह क्या बात हुई ? जिन सज्जनों को यहाँ खेमेबंदी की बू आरही हो, वह कृपया यहाँ से हट जायें आज तिरंगे को देख बैठे-बिठाये एक तरंग उठी, आखिरकार इस भारतदेश को आज़ादी कैसे मिली ? बड़ी अज़ीब तरह की बात है, अरे कौन नहीं जानता उस गाँधी महा-हुतात्मा को ? शेष... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार
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[22 Apr 2010 11:31 AM]

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