अर्श से फ़र्श तक

कुछ तो है... जो कि, आज शनिवार है, या समझिये कि था, मेरे साप्ताहिक अवकाश का दिन ! शनिवार या सनीचर को छुट्टी रखने की मेरी अपनी जो भी व्यक्तिगत वज़हें हों.. पर क्या सूर्यपुत्र शनियों से भारतदेश कभी उबर भी पायेगा ? सूर्यपुत्र यानि कि  शिखर पर बैठे देपीप्यमान नीतिनियँता.. जो... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार
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[24 Apr 2010 14:49 PM]

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