गाज़ा में कविता है लापता : बफ़ व्हिटमन-ब्रॅडली
गाज़ा में कविता है लापतागाज़ा में कविता है लापताहालाँकि उसके देखे जाने की छुटपुट और अपुष्ट सूचनाएं हैंएक कहता है कि उसे गटर से बहते हुएउफनती हुई खून की नदी में मिलते देखादूजा खबर देता है कि बम फटने से मलबे और मिट्टी में बदल गईइमारत के नीचे उसकी चीखें...
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भारत भूषण तिवारी
विश्व कविता
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[26 Apr 2010 23:26 PM]



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