मुझे मिले वे चरण

Unmanaa प्राण तरसते रहे निरंतर, मिला किसी का प्यार नहीं,मुझे मिले वे चरण कि जिन पर कुछ मेरा अधिकार नहीं ! मंजिल दूर, डगर अनजानी, जीवन पथिक थका हारा,एकाकी सर्वस्व लुटा कर फिरता है मारा-मारा,निज अभीष्ट मंदिर का जिसने पाया अब तक द्वार नहीं,मुझे मिले वे चरण कि जिन... [पूरी पोस्ट]
writer Sadhana Vaid
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[26 Apr 2010 22:51 PM]

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