सुख की कीमत

तेजस्विनी संवाद एक मूर्तिकार लगातार कई दिनों से जंगल से गुजरने के दौरान एक पेड़ के नीचेपड़े पत्थर पर अपनी थकान मिटाता था. उसे उस पत्थर से जैसे प्यार हो गयाथा सो उसने सोचा की क्यों न इस पत्थर को एक आकार दे दिया जाए जिससे इसका प्रभाव और सम्मान बढ़ जाए, ऐसा विचार करके उसने... [पूरी पोस्ट]
writer sanjeev persai

बात पते की

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[26 Apr 2010 22:53 PM]

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