गीतों ने किया रात ये संवाद ग़ज़ल से
गीतों ने किया रात ये संवाद ग़ज़ल से। हुशियार हमें रहना है इतिहास के छल से॥जब आस्था मन में न थी क्यों आये यहाँ आप, इक पल में हुए जाते हैं क्यों इतने विकल से॥क्या आगे सुनाऊं मैं भला अपनी कहानी,प्रारंभ में ही हो गये जब लोग सजल से॥मुम्ताज़ के ही रूप की आभा...
[पूरी पोस्ट]
युग-विमर्श
ग़ज़ल / गीतों ने किया रात
13
0
0
0
4
[26 Apr 2010 10:36 AM]



Shuffle







