तुझमें कोई कमी नहीं पाते
फिराक गोरखपुरी की गजलबन्दगी से कभी नहीं मिलतीइस तरह ज़िन्दगी नहीं मिलतीलेने से ताज़ो-तख़्त मिलता हैमांगे से भीख भी नहीं मिलतीएक दुनिया है मेरी नज़रों मेंपर वो दुनिया अभी नहीं मिलतीजब तक ऊँची न हो जमीर की लौआँख को रौशनी नहीं मिलतीतुझमें कोई कमी नहीं...
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प्रभात रंजन
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[26 Apr 2010 08:27 AM]



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