तुझमें कोई कमी नहीं पाते

हलफ़नामा फिराक गोरखपुरी की गजलबन्दगी से कभी नहीं मिलतीइस तरह ज़िन्दगी नहीं मिलतीलेने से ताज़ो-तख़्त मिलता हैमांगे से भीख भी नहीं मिलतीएक दुनिया है मेरी नज़रों मेंपर वो दुनिया अभी नहीं मिलतीजब तक ऊँची न हो जमीर की लौआँख को रौशनी नहीं मिलतीतुझमें कोई कमी नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभात रंजन
views
13
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[26 Apr 2010 08:27 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix