सीधी बात है कहने दो !
सीधी बात है कहने दो !जो जैसा है रहने दो !!ज़ब्त हम में है बहुत !हर सितम को सहने दो !!बेरहम जज़्बात के !अब शहर को ढहने दो !!हाथ-पैर जकड़े हुए !कुछ जुबां से कहने दो !!मोहलत से आये बड़ी !अश्कों को अब बहने दो !!दिल में मुहब्बत नहीं !‘सैल’ तकल्लुफ रहने दो !!...
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Indranil Bhattacharjee ........."सैल"
ghazal
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[26 Apr 2010 08:12 AM]



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