कि फिर आऐगी सुबह
कि फिर आऐगी सुबह हर सुबह एक नई उम्मीद लाती है खब्बो से निकाल हमकोजगाती है अब शाम ढले तो उदास मत होना उम्मीदों कों सिरहाने रखकर तुम चैन से सोना कि फिर आऐगी सुबह हमको जगाऐगी सुबह रास्ते बताऐगी सुबह उम्मीदों कें सफर को मंजिल तक पहूंचाऐगी...
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अरूण साथी
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[26 Apr 2010 07:40 AM]



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