दर्द
दर्द को जब भी दबाऊं तो छलक आता हैजख्म का ये मिजाज़ हमको नहीं भाता हैहम तो रखतें है छुपा कर कई परतों के तलेदाग दिल का न जाने कैसे उभर आता हैमैंने हर दर्द को हमदर्द की तरह पलासहा चुप रह के हर एक जख्म, हर एक छालाखिली दोपहर भी देती है अँधेरे मुझकोदिखता है...
[पूरी पोस्ट]
ranjana
28
4
0
4
7
[26 Apr 2010 04:55 AM]



Shuffle








