दर्द

A poetess blog दर्द को जब भी दबाऊं तो छलक आता हैजख्म का ये मिजाज़ हमको नहीं भाता हैहम तो रखतें है छुपा कर कई परतों के तलेदाग दिल का न जाने कैसे उभर आता हैमैंने हर दर्द को हमदर्द की तरह पलासहा चुप रह के हर एक जख्म, हर एक छालाखिली दोपहर भी देती है अँधेरे मुझकोदिखता है... [पूरी पोस्ट]
writer ranjana
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[26 Apr 2010 04:55 AM]

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