रचने वाले ही बच जाते है मरने के बाद...चिड़िया, तुम कहाँ हो...?

Nayachintan एक दिन जब हम नहीं रहेंगे तब हरे-भरे पेड़ बन कर लोगों को छाँव दे रहे होंगे या फिर फूल बन कर बगरा रहे होंगे खुशबुएँ चारों ओर पेड़ न लगाया होगा तो किसी प्यासे को पिलाया होगा पानीभूखे को कभी दिल से परोसा होगा खानातब हम उसके दिल में रहेंगे... [पूरी पोस्ट]
writer girish pankaj

नई कविता

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[26 Apr 2010 02:13 AM]

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