वो इक भोली-सी लड़की जो मेरे सपनों में आती है

कलम का सिपाही गजल-राजेश त्रिपाठीहवाएं गुनगुनाती हैं, वह जब जब मुसकराती है।घटाएं मुंह चुराती हैं, वो जब जुल्फें सजाती है।।फिजाएं झूम जाती हैं, वो जब जब गीत गाती है।वो इक भोली-सी लड़की जो मेरे सपनों में आती है।।किसी मंदिर की मूरत है, किसी की कल्पना है वो।किसी सुंदर से... [पूरी पोस्ट]
writer Rajesh Tripathi
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[26 Apr 2010 01:56 AM]

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