ओ मेरे प्यारे
सुनो तुम्हें ढूंढ रही हूँजन्मों से रूह आवाराभटकती फिरती हैइक तेरी खोज मेंऔर तू जो मेरेवजूद का हिस्सा नहींवजूद ही बन गया हैना जाने फिर भीक्यूँ मिलकर भीनहीं मिलतासिर्फ अहसासों मेंमौजूद होने सेक्या होगा अदृश्यता...
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वन्दना
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[26 Apr 2010 02:07 AM]



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