आभूषण रहित धरा को कर क्यों लोग मनाते दीवाली ? -सतीश सक्सेना

मेरे गीत ! कितने कवियों ने मौसम की गाथा गायी कविताओं मेंअब मौसम पर कविता लिखते लेखनी ठहर क्यों जाती है बरसों बीते , दिखती न कहीं हर ओर छा रही हरियाली अब धुआं भरे इस मौसम में क्यों लोग मानते दीवाली ? धरती की छाती से निकली सहमी सहमी कोंपलें दिखे काला गहराता धुआं... [पूरी पोस्ट]
writer सतीश सक्सेना
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[26 Apr 2010 00:14 AM]

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