सुख की मेरे पहचान रे...

पाल ले इक रोग नादां जिंदगी के वास्ते... विगत कुछ दिनों से ब्लौग से एक अपरिभाषित-सी दूरी बन गयी है। मोह-भंग, कुछ अपनी व्यस्ततायें, वादी में गर्माता माहौल, ब्लौग-जगत की अजीबो-गरीब लीलायें...तमाम वजहें हैं, लेकिन वो कहते हैं ना कि शो मस्ट गो ऑन तो इसी कहन के हवाले से पेश है एक गीत। पिछले साल... [पूरी पोस्ट]
writer गौतम राजरिशी

बहरे रज़ज

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[25 Apr 2010 22:30 PM]

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